Pills on a US dollar bill

दवा अनुसंधान के लिए मेगाफ़ंड

सिएटल – जिस समय कुछ चुनिंदा दवा कंपनियों की कीमत-वसूल करनेवाली प्रथाएँ सुर्खियों में छा रही हैं, इस कहानी के परेशान करने वाले एक पहलू पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जेनरिक दवाओं सहित मौजूदा दवाओं की कीमतों में होनेवाली अत्यधिक बढ़ोतरियाँ, बेहताशा मुनाफाखोरी से प्रेरित नहीं हैं, बल्कि नई दवाओं को विकसित करने की आर्थिक व्यवहार्यता के बारे में गहरे संदेह से भी प्रेरित हैं। यह संदेह जायज़ है।

दवा के विकास के लिए वित्तपोषण के पारंपरिक मॉडल डगमगा रहे हैं। अमेरिका और कई अन्य विकसित देशों में, किसी नई दवा को बाजार में लाने की औसत लागत आसमान छू रही है, हालाँकि उद्योग की सबसे अधिक लाभदायक दवाओं में से कुछ के पेटेंट की अवधि समाप्त हो चुकी है। वेंचर कैपिटल ने प्रारंभिक चरण की जीवन विज्ञान कंपनियों से हाथ खींच लिए हैं, और बड़ी दवा कंपनियों ने देखा है कि अनुसंधान और विकास पर खर्च किए गए प्रति डॉलर की तुलना में बाज़ार में बहुत कम दवाएँ पहुँचती हैं

वास्तव में, औसत रूप से, प्रारंभिक चरण के अनुसंधान में संभावित रूप से उपयोगी के रूप में पहचान किए गए प्रत्येक 10,000 यौगिकों में से केवल एक को ही अंततः नियामकों से मंजूरी प्राप्त होगी। अनुमोदन प्रक्रिया में 15 वर्ष जितना लंबा समय लग सकता है और इसमें सावधानी को वरीयता दी जाती है। यहाँ तक कि जो दवाएँ मानव चिकित्सीय परीक्षणों के लिए अनुमोदित होती हैं, उनमें से पाँच में से केवल एक दवा ही अंतिम बाधा को पार कर पाती है।

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